Saturday, May 30, 2015

सबसे पहले हम मान लें यह हिंदू राष्ट्र है सन् 47 से,तभी मुकाबला संभव है हिंदू साम्राज्यवाद का आरक्षण नहीं,पुणे करार लागू राजनीतिक संरक्षण में सीमाबद्ध है समता और सामाजिक न्याय,इससे बहुजनों को कोई अवसर नहीं, मुक्ति असंभव धरती रोज काँपती है और महानगरीय सभ्

सबसे पहले हम मान लें यह हिंदू राष्ट्र है सन् 47 से,तभी मुकाबला संभव है

हिंदू साम्राज्यवाद का

आरक्षण नहीं,पुणे करार लागू

राजनीतिक संरक्षण में सीमाबद्ध है समता और सामाजिक न्याय,इससे बहुजनों को कोई अवसर नहीं, मुक्ति असंभव

धरती रोज काँपती है और महानगरीय सभ्यता को परमाणु विध्वंस का बेसब्री से इंतजार

पलाश विश्वास

परसो ही हमने लिखाः

इस वर्गीय शासन और राजकाज के फासिस्ट स्थाई मनुस्मृति बंदोबस्त को बदलने के लिए अब और आंखमिचौनी के बदले हम सीधे इस सामाजिक आर्थिक यथार्थ के निरंतर प्रवाहमान इतिहास को मान लें कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और यहां हिंदू साम्राज्यवादियों का ही वर्गीय वर्चस्व है जो मनुष्यता और प्रकृति दोनों के लिए कयामत का मंजर है।मनुस्मृति के इस फासिस्ट मंजर को बदले बिना सत्ता परिवर्तन से कोई बदलाव इस राष्ट्र व्यवस्था में होगी नहीं जो दरअसल बहुसंख्य बहुजनों के खिलाफ सैन्य दमन तंत्र के सिवाय कुछ भी नहीं है।अस्मिताओं को तोड़े बिना,पूरे देश की मनुष्यता को बदलाव के लिए जोड़े बिना यह असंभव है कि धार्मिक ध्रूवीकरण के वर्गीय शासनतंत्र को बदलने के लिए हम कुछ भी कर सकें।


इस प्रस्थानबिंदू पर अनिवार्य सहमति और उसके मुताबिक देशव्यापी आम जनता का मोर्चा बनाने के बजाय गरम हिंदुत्व के बदले नरम हिंदुत्व के आवाहन के निरंतर सिलसिला से सामाजिक बदलाव, समता,समरसता औरसामाजिक न्यायके उदात्त लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों की जुगाली करते हुए हम दरअसल हिंदू राष्ट्र के ही मनसबदार सिपाहसालार बनने की अंधी दौड़ में शामिल हैं और मुक्तिकामी जनता के हक हकूक की लड़ाई में शामिल होने के बजाय हम मुक्तबाजारी नरसंहारों को अंजाम देने की भावभूमि को ही मजबूत कर रहे हैं।

आरएसएस, भाजपा और भारतीय राज्य एक बार फिर बाबासाहेब आंबेडकर को अपनी राजनीति को जायज ठहराने के लिए उनको 'अपनाने' की कोशिश कर रहा है. उन्हें एक 'हिंदू राष्ट्रवादी' बताना इसी साजिश का हिस्सा है. लेकिन जातियों के उन्मूलन और ब्राह्मणवाद के ध्वंस के लिए लड़ने वाले  बाबासाहेब का जीवन, चिंतन, उनके संघर्ष और उनका लेखन उन सभी चीजों के खिलाफ खड़ा है, जिनका प्रतिनिधित्व संघ, भाजपा या भारतीय राज्य करते हैं. मिसाल के लिए देखिए कि उन्होंने हिंदू राज के बारे में क्या कहा था. उनकी किताब पाकिस्तान ऑर द पार्टीशन ऑफ इंडिया से. बाबासाहेब की जयंती पर उन्हें याद करते हुए.


''अगर हिंदू राज असलियत बन जाता है, तो इसमें संदेह नहीं कि यह इस देश के लिए सबसे बड़ी तबाही होगी. हिंदू चाहे जो कहें, हिंदू धर्म स्वतंत्रता, बराबरी और भाईचारे के लिए खतरा है. इस लिहाज से यह लोकतंत्र के साथ नहीं चल सकता. हिंदू राज को किसी भी कीमत पर रोकना होगा.''- डॉ. बी.आर. आंबेडकर


बाबासाहेब के अनुयायी स्वयंभू अंबेडकरी विरासत के दावेदार दरअसल कर क्या रहे हैं,यह आम जनता से और खासकर बहुजन जनता से छुपा कोई राज भी नहीं है कि हम रोज रोज उसका खुलासा करके मठाधीशों और मसीहावृंद के अंध भक्तों को और गर्द फैलाने का मौका देते हुए पहले से खंड खंड खंडित बहुजन समाज के विखंडन का काम करते रहें।

अब देख लीजियेः

Where is the expected outcry from Dalit groups?This PM is bloody touchy. He gets offended if students discuss his failures or criticise his communalised and corporatised politics.

This PM is bloody touchy. He gets offended if students discuss his failures or criticise his communalised and corporatised politics.


This cannot only be the students' fight. It's got to be everyone's.


Why are Congress, CPM, CPI, AAP, JDU all silent on this?  Are they waiting to make it an issue only if it affects their own fiefdoms?


Not even a whimper of protest from DMK, PMK, AIADMK, all of who claim Periyar.


Where is the expected outcry from Dalit groups?


"Though the platform created a space for the students of IITM to discuss and debate on issues directly affecting the peasants, labours and the common mass, APSC continuously faced threats from rightwing groups inside IITM. Even the administration tried to curtail the activities of APSC, in June 2014, the DoS Dr.M.S.Sivakumar directed us to change name stating that the names 'Ambedkar and Periyar' are politically motivated and thus the study circle should be renamed with some apolitical titles without any personolity's name. APSC took stubborn decision to stick with the same title. We also indicated, the activities of right wing groups under the banner of Vivekananda Study Circle, but the Dean of Student's said they have been using the name (Vivekananda) for many years and he denied to change the name of "Vivekananda study circle". For a second time in September 2014, he sent a mail for the same reason, through MITR (the general counseling unit for students run by IITM admin) rather than from Dean's office stating that the name is polarising the students. We clearly explained the Dean, the motto of the study circle and relevance of Ambedkar and Periyar's name."



http://www.countercurrents.org/apsc290515.htm



अंबेडकरी आंदोलन के लिए सबसे जरुरी है बाबासाहेब के जाति उन्मूलन के एजंडे को प्रस्थान बिंदू बनाकर हिंदू राष्ट्र और हिंदू साम्राज्यवाद के मनुस्मृति शासन,राजकाज,तंत्र मंत्र यंत्र और बजरंगी सैन्यदमन राष्ट्र व्यवस्था के खिलाफ आजादी की लड़ाई शुरु करना।

भूले नहीं,पुणे करार में ही हिंदू राष्ट्र की बुनियाद।


बाबासाहेब ने समान अवसरों के साथ साथ संसाधनों के समान बंटवारे की बात भी कही थी समता और सामाजिक न्याय के लिए,जो समरसता काल में नस्ली रंगभेदी पुरुषवर्चस्व के तहत देश बेचो अभियान में तब्दील है।


बाबासाहेब ने मनुष्यता और प्रकृति के हित में अर्थव्यवस्था लोककल्याणकारी राज्य के हवाले करने के लिए संविधान में मौलिक अधिकारों,जनमजात नागरिकता और नीति निर्धारक सिद्धांतों के प्रावधान किये थे और स्त्रियों और मेहनतकश जनता के हक हकूक के लिए श्रम कानून से लेकर संवैधानिक रक्षाकवच तक सारे इंतजाम किये थे।जो खत्म हैं।

आदिवासियों के लिए पाचवीं और छठीं अनुसूचियों के इंतजाम किये थे,जो खतम हैं।


अब भी लोगों को लगता है कि लोकतंत्र है हिंदू राष्ट्र में तो सिर्फ इसलिए कि इस गैस चैंबरी मृत्यु उपत्यका के लोगों को पक्का यकीन है कि कानून का राज है और संसद से सड़क तक जो भी कुछ होगा कानून के मुताबिक होगा।वे बस इस इंतजार में है कि उनका गला भी रेंत दिया जाये,चाहे सर कलाम कर दिया जाये,चाहे उनकी जिंदगी हो जाये सलवा जुड़ुम,तो भी जो बी हो रहा है ,कानूने मुताबिक हो रहा है और विधानसभा में न सही,संसद में माई बाप लोग बइठल हो जो किरया करम कर दिब।


इसीलिए अब भी जब न नौकरियां हैं और न नियुक्तियां हो रही हैं, रोबोट और क्लोन के इस बायोमैट्रिक दुष्काल में एक अकेली मशीन में समाहित उत्पादन प्रणली और मेहनतकशों के सफाये के शापिंग दुस्समय के खुदरा एफडीआई बाजार में बहुजनों का यह यकीन दिलाया जा रहा है कि संविधान के मुताबिक दिये जाने वाले आरक्षण से अजा आजजा और पिछड़ों को समान अवसर और समानता का दर्जा के साथ साथ सत्ता में भागेदारी भी मिल रही है।


इसी  खुशफहमी में छह हजार से ज्यादा जातियों में बंटे बहुजन समाज में मारामारी है आपस में खूब और हिंदुत्व के नर्क जाति व्यवस्था बनाये रखने में ही और जाति के जरिये सबकुछ हासिल करने के जुगाड़ में ही सारी ताकत झोंकी जा रही है और मुंह बाएं खड़ी हत्यारी मनुस्मृति के खूनी खंजर पर किसी की नजर नहीं है और न हिंदू राष्ट्र के इस वधस्थल की नरसंहारी अर्थव्यवस्था को समझने की कोई कोशिश हो रही है।


काला नाग ने काटा नहीं,जनप्रतिबद्ध युवा कवि को इसकी खुशी है जबकि वह किसी को भी कहीं भी कभी भी काट सकता है।ऐसे जहरीले काले नागों से घिरे हैं हम।

Nityanand Gayen

18 hrs ·

अभी -अभी

हम आँगन में बैठकर आम चूस रहे थे और ई महाराज मेरे चरणों में लौट रहे थे। अच्छा हुआ कि किस नहीं किया। हम बच गए।

Nityanand Gayen's photo.


सबसे पहले हम मान लें यह हिंदू राष्ट्र है सन् 47 से,तभी मुकाबला संभव है

हिंदू साम्राज्यवाद का।

आरक्षण नहीं है,पुणे करार लागू है बहुजनों को गुलाम बनाये रखने के लिए राजनैतिक आरक्षण के तहत सत्ता में मलाईदारों की भागेदारी और बाकी जनता के कत्लेआम का स्थाई बंदोबस्त है मुक्तबाजार का यह रंगभेदी स्त्रीविरोधी वर्णवर्चस्वी मर्द मैनफोर्स मनुस्मृति शासन।


राजनीतिक संरक्षण में सीमाबद्ध है समता और सामाजिक न्याय,इससे बहुजनों को कोई अवसर नहीं, मुक्ति असंभव

धरती रोज काँपती है और महानगरीय सभ्यता को परमाणु विध्वंस का बेसब्री से इंतजार



हमारे गुरुजी TaraChandra Tripathi ने यह तस्वीर शेयर की हैः
यहाँ धरती रोज काँपती है. पर----

(तोक्यो के काचीडोकी चुओ कू स्थित हमारे आवास का ६२ मंजिला भवन)

जाहिर है कि धरती रोज काँपती है और महानगरीय सभ्यता को परमाणु विध्वंस का बेसब्री से इंतजार।

परसो ही हमने लिखा यह और कल नयी दिल्ली में रेडियो एक्टिव लीक से हड़कंप और तुरत फुरत युद्धस्तरीय तत्परता से मामला रफा दफा लीक और फतवा जारी कि रेडियोएक्टिव लीक दरअसल रेडियो एक्टिव नहीं है।


दवाइयों और रसायनों का खुल्ला बाजार है भारत,यह जीतना सच है,उससे बड़ा सच यह है कि भोपाल गैसत्रासदी जैसे प्रयोग की बहुराष्ट्रीय पूंजी को खुली छूट है ।हरित क्रांति के रसायन से लबालब हमारी मधुमेह प्रजाति।मनसेंटो।


शीतल पेय से लेकर पानी और दूध तक में जहर।कुछ लोग पेशाब पीकर भी गुजारा कर सकते हैं और यह उनका धर्म भी है।उससे कहीं ज्यादा यह मुनाफावसूली का सबसे मजबूत मकड़जाल हुआ ठैरा।श्वमूत्र पान करें अब प्रजाजन।आयुर्वेद ही सहारा क्योंकि बाकीर इलाज के खाते खेंस में पइसा नइखे।


बाकी लोग जो स्वमूत्र पान कर नहीं सकते, संकट दरअसल उन्हीं का है।क्योंकि सारे दरवाजे,सारी खिड़कियां और रोशनदानों से घुस रही है विदेशी पूंजी के साथ विदेशी रेडियोएक्टिव बीमारियां और हिमालय का परमाणु बम कभी भी कहीं भी फट सकता है।महाभूंकप के बाद लापता होने लगे हैं तमाम ग्लेशियर ते नमामि गंगे से क्या होगा।

कृपया देखेंः

Radioactive leak might be a reality anytime! New Delhi might not be that safe as it seems to be.

Radioactive leak might be a reality anytime! New Delhi might not be that safe as it seems to be.

http://www.hastakshep.com/



TaraChandra Tripathi's photo.

TaraChandra Tripathi's photo.



स्थायी व्यवस्था है अजा-अजजा आरक्षण

स्थायी व्यवस्था है अजा-अजजा आरक्षण

2015/05/29 Comments

अजा-अजजा आरक्षण स्थायी व्यवस्था 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, जिसे 65 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इस दौरान विधिक शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय ... Read More »


हम जो लिख रहे हैं,उससे बहुसंख्य बहुजनों में जो अस्मिता राजनीति की सत्ता राजनीति से समता सामाजिक न्याय और समरसता का सपना संजोये हुए हैं बिना बाबासाहेब के जाति उन्मूलन के एजंडे को छुए,अपनी अपनी जाति के लिए सारे मौके सहेजने की आपाधापी में,उन्हें लगाता है कि हम आरक्षणविरोधी किसी आंदोलन के कोई अरविंद केजरीवाल हैं और हमारा जनसुनवाई मंच कोई यूथ फार इक्वालिटी है।


सोशल मीडिया मार्फत ऐसी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं,जैसे कि हम लोग आरक्षण को खत्म करने पर तुले हैं।आरक्षण जो निजीकरण,उदारीकरण और ग्लोबीकरण के मुक्त बाजार में समरसता में निष्णात धोखाधड़ी में तब्दील कर दिया है मिलियनर बिलियनर मनुस्मृति स्थाई बंदोबस्त के जमींदारों ने, हम चूंकि उसे रेखांकित कर रहे हैं।और बहुजनों के विध्वंसक हिंदू साम्राज्यवादी मुक्त बाजार को बेपरदा कर रहे हैं।

हमारे पेश तथ्यों के मुकाबले हिंदुत्व के मलसबदारों और सिपाहसालारों की दलीलें कु छ इसी तरह की हैः

Rationality in question!

"Earthquakes are caused by the Jeans-Wearing Women"

Maulana Fazlur Rehman: "From earthquakes to inflation are caused by the Jeans-Wearing Women" Islamabad: Jamiat Ulema-e-Islami Fazl (JUI-F) Chief Maulana...

SHEIKYERMAMI.COM




समान शिक्षा के बदले जो नालेज इकोनामी है,उसमें आरक्षण के बावजूद गरीब बच्चों को लाखों के दांव पर सत्ता शिशुओं की शिक्षा के समान शिक्षा राममंदिरों में दाखिला असंभव है क्योंकि आरक्षण भी खरीद क्षमता से नत्थी है।


कृपया अपने अपने राज्य में उन अजा,अजजा और पिछड़ी जातियों की तनिक सुधि लीजिये जिन्हें बाहुबलि जातियों को मिले आरक्षण की वजह से सन 47 से और मंडल कमंडल खूनी समय में न आरक्षण मिला है और न जीवन के किसी क्षेत्र में उनका प्रतिनिधित्व है।


आरक्षण मिला नहीं है,लेकिन समाज में अछूत चिन्हित हैं और हाशिये पर हैं तो सामान्य वर्ग में भी एक कदम आगे बढ़ नहीं सकते।घुसे तो अस्पृश्य ही बने रहें।


यह हमारा भोगा हुआ यथार्थ है।


बाबासाहेब का नाम जापते हुए,महापुरुषों और पुरखों को याद करते हुए, जन्मजिन और तिरोधान दिवस मनाते हुए मूर्तिपूजा के हिंदुत्व में निष्णात हम यह कतई समझने को तैयार नहीं हैं कि इस देश में आजादी सिर्फ सत्ता वर्ग की है और प्रजाजन हजारों साल से जैसे गुलाम रहे हैं,वैसे ही गुलाम हैं।जबकि हरिचांद गुरुचांद ठाकुर,महात्मा ज्योति बा फूले और बाबासाहेब अंबेडकर बार बार चेतावनी देते रहे हैं कि उनका स्वराज हमारी गुलामी के सिवाय और कुछ भी नहीं है।


देश के बहुजन बहुसंख्य लोग पुणे करार भूल गये हैं और पुणे करार के तहत ही सत्ता की मलाई चाटने के लिए आपसी मारकाट में लहूलुहान हो रहे हैं,हम बार बार यही बताने की कोशिश कर रहे हैं और पूरी अर्थ व्यवस्था का खुलासा करते हुए वंचित वर्ग के बहिस्कार और कत्लेआम के स्थाई बंदोबस्त के जमींदारों को बेनकाब कर रहे हैं।


क्योंकि आरक्षण नहीं,पुणे करार लागू है राजनीतिक संरक्षण का।

क्योंकि राजनीतिक संरक्षण में सीमाबद्ध है समता और सामाजिक न्याय।


हस्तक्षेप पर लगे डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', आस्तिक हिन्दू! के आलेख में कहा गया है कि अजा-अजजा को सरकारी शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में मिला आरक्षण संविधान की स्थायी व्यवस्था, जबकि राजनेता और सरकार जनता को करते रहे-भ्रमित…

कुछ दुराग्रही लोग आरक्षण को समानता के अधिकार का हनन बतलाकर समाज के मध्य अकारण ही वैमनस्यता का वातावरण निर्मित करते रहते हैं। वास्तव में ऐसे लोगों की सही जगह सभ्य समाज नहीं, बल्कि जेल की काल कोठरी और मानसिक चिकित्सालय हैं।


फिर उनने लिखा हैःअब सवाल उठता है कि यदि अजा एवं अजजा के लिये सरकारी सेवाओं और सरकारी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की स्थायी व्यवस्था है तो संसद द्वारा हर 10 वर्ष बाद जो आरक्षण बढाया जाता रहा है, वह क्या? इस सवाल के उत्तर में ही देश के राजनेताओं एवं राजनीति का कुरूप चेहरा छुपा हुआ है।


सच्चार्इ यह है कि संविधान के अनुच्छेद 334 में यह व्यवस्था की गयी थी कि लोक सभा और विधानसभाओं में अजा एवं अजजा के प्रतिनिधियों को मिला आरक्षण 10 वर्ष बाद समाप्त हो जायेगा। इसलिये इसी आरक्षण को हर दस वर्ष बाद बढाया जाता रहा है, जिसका अजा एवं अजजा के लिये सरकारी सेवाओं और सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रदान किये गये आरक्षण से कोर्इ दूर का भी वास्ता नहीं है। अजा एवं अजजा के कथित जनप्रतिनिधि इसी आरक्षण बढाने को अजा एवं अजजा के नौकरियों और शिक्षण संस्थानों के आरक्षण से जोड़कर अपने वर्गों के लोगों का मूर्ख बनाते रहे हैं और इसी वजह से अनारक्षित वर्ग के लोगों में अजा एवं अजजा वर्ग के लोगों के प्रति हर दस वर्ष बाद नफरत का उफान देखा जाता रहा है। लेकिन इस सच को राजनेता उजागर नहीं करते!

आरक्षण की स्थाई व्यवस्था को जो हवाला निरंकुश दे रहे हैं कि -इस विषय से अनभिज्ञ पाठकों की जानकारी हेतु स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि

भारतीय संविधान के भाग-3 के अनुच्छेद 12 से 35 तक मूल अधिकार वर्णित हैं। मूल अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा होते हैं, जिन्हें किसी भी संविधान की रीढ की हड्डी कहा जाता है, जिनके बिना संविधान खड़ा नहीं रह सकता है। इन्हीं मूल अधिकारों में अनुच्छेद 15 (4) में सरकारी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिये अजा एवं अजजा वर्गों के विद्यार्थियों के लिये आरक्षण की स्थायी व्यवस्था की गयी है और अनुच्छेद 16 (4) (4-क) एवं (4-ख) में सरकारी नौकरियों में नियुक्ति एवं पदोन्नति के आरक्षण की स्थायी व्यवस्था की गयी है, जिसे न तो कभी बढ़ाया गया और न ही 2020 में यह समाप्त होने वाला है।- उसे भारतीय संविधान की रोज रोज हो रही हत्या के संदर्भ में देखने की जरुरत है।


उसे संपूर्ण निजीकरण,संपूर्ण विनियंत्रण,संपूर्ण विनिवेश,संपूर्ण केंद्रीयकरण,संपूर्ण विनियमन, संपूर्ण विदेशी पूंजी ,संपूर्ण विदेशी हित और संपूर्ण विध्वंस के फासीवादी हिंदुत्व के एजंडे के आलोक में देखे बिना हम समझ ही नहीं सकते कि क्यों लिखित परीक्षाएं पास करने के बावजूद करोड़ों बहुजन बच्चों को नौकरियां नहीं मिलती रही है और आरक्षित पदों पर योग्य उम्मीदवार न मिलने की वजह से वहां सवर्णों की नियुक्ति होती रही है और अब क्यों ठेके पर हो रही हैं तमाम नियुक्तियां बचे खुचे सरकारी महकमों में भी।


सत्ता वर्ग के रंगभेदी नस्लभेदी  चरित्र का सबसे लाइव प्रसारण आईपीएल का श्वेत चियारिन जलवा है।कालारंग से परहेज का सिलसिला है यह मुक्तबाजार और राजकाज गोरा बनाने का उपक्रम और इसीलिए कारे कारे बहुजन सारे गोरा बनने के फिराक में बजरंगी हुओ रे।


खेल में बाजार है कि बाजार में खेल है,इसे क्रिकेट के रंगबहार से न समझें तो फुटबाल और फिफा से समझ लें।


श्रीनिवासन और ब्लाटर एक ही कोष्ठक में है।

पता नहीं कैसा लगता होगा आपको ,जबकि बाजार में घोड़ों की तरह नीलामी पर बेचे जाते हैं तमाम खेल खिलाड़ी।


पता नहीं आपको कैसा लगता हो कि नीता अंबानी के आगे पीछे लाइन लगाकर डोले बिग बी,सचिन तेंदुलकर,अनिल कुंबले,रिकी पोंटिंग और जांटी रोड्स।


मुक्त बाजार ब्रांडिंग का खेल हैं।आइकन से लेकर सिविल सोसाइटी, तमाम माध्यम और राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था सबकुछ ब्रांडिंग के हवाले क्योंकि ब्रांड देखा नहीं कि आगा पीछा सोचे बिना जनता जहर पीने को तैयार।मौत का जश्न है यह।


गोरा गोरा रंग और फेयरनेस इंडस्ट्री और श्वेत वर्चस्व का ग्लेमर कोशेंट,वाइटल स्टेटिक्स और विकास दर का पीपीपी माडल है सामाजिक मूल्यबोध से लेकर तमाम प्रतिमान,व्याकरण और मानक।


सर्वत्र इसकी नंगी अभिव्यक्ति मनुस्मृति राज में रंगभेदी उत्पीड़न और नरसंहार और आपदाओं का इंद्रधनुष है।


वर्ल्ड कप के पिटारे से तमाम सांप निकलने लगे हैं और बताइये कहीं नहीं हैं नागराज का साम्राज्य।मुक्तबाजार में सबकुछ मैच फिक्सिंग है,सबकुछ गटआप है और सबकुछ संसदीय सहमति ताकि बिनलियनर मिलियनर तबके के सभी पक्षों को सारी की सारी मलाई न मिलती रहे और बाकी लोगों को मिडडे मिल का लंगरखाना और ट्रिकलिंग ट्रिकंलिग झुनझुना पकड़े मैनफोर्स के सौजन्य से टनटनाते रहिये।


बहुमंजिली महानगरीय सभ्यता को परमाणु विध्वंस का बेसब्री से इंतजार।


इससे पहले हर गांव को शहर में तब्दील करने की तैयारी और हर खेत में श्मशान।


आज सुबह ठीक दस बजे बिजली चली गयी और अब दो बजे आयी है।फिर कब तक रहेगी,मालूम नहीं है।


बहरहाल बांग्ला अखबारों में खबर छपी है कि मांग के मुताबिक बिजली आपूर्ति हो नहीं है और कंपनियों के मुताबिक कोयला और ईंधन की भारी कमी है।माने कि लोडशेडिंग जारी रहनी है।बिजली दरें बढ़ती रहेंगी और परमाणु विकल्प खुल्ला रहेगा।


जैसे हमारी सेनाओं के पास लड़ने ला.यक हथियार कभी नहीं होते और रक्षा सौदों का सिलसिला बनाये रखना होता है और बाद में महामहिम को विदेश दौरे के मौके पर सफाई देनी पड़ती है कि घोटाला घोटाला नहीं,मीडिया ट्रायल है तो भारत सरकार को पिछली भारत सरकार को भ्रष्ट बताते रहने का औचित्य साबित करने के लिए राष्ट्रपति को सेंसर करने के लिए विदेशी सरकार को राष्ट्रपति का दौरा तक रद्द करने की धमकी देनी होती है।


वही भारत सरकार दुनियाभर से परमाणु रिएक्टर खरीद रही है और महानगरों को परमाणु रिएक्टरों से घेर रही है।बंगाल के अखबारों में खबर है कि भले ही कल कारखाने तमाम बंद है और उत्पादन शून्य है ,लेकिन बिजली संकट की वजह से लोडशेडिंग अब नियमित होगी।


यह अभूतपूर्व बिजली संकट कई दफा ग्रिड फेल के बहाने पूरे देश को अंधकार में धकेल चुका है और आपूर्ति सुधारने की गरज से बिजली से लेकर कोयला तक का निजीकरण और विनियंत्रण विनिवेश और विनियमन का खुल्ला खेल जारी है तो निजी बिजली कंपनियों को इस बहाने आम जनता पर बिजली गिराते रहने की हर किस्म की छूट है और इसी को आधार बनाते हुए परमाणु विकल्प है।


महानगरों के विस्तार के साथ साथ हम फुकोसोमा और चेर्नोबिल के परमाणु विध्वंस से वैसे ही घिर रहे हैं जैसे तीर्थाटन और पर्यटन और पर्वतारोहण के बहाने पूरे हिमालय को एक मुकम्मल महानगर बनाने के फेर में उसे परमाणु विस्फोटों का सिलसिला बनाये हुए हैं।


सविता बाबू ने आज भी आठे बजे जगा दिया था।लेकिन मेलबाक्स की सफाई में ही दो घंटे लग गये और बाजार वाजार दुनिया के लंबित कामकाज निपटाकर अब जाकर कहीं बिजली रानी की सोहबत में हूं।


लोडशेडिंग का अंकगणित और परमाणु विकास से आबाद होरहे महानगरीय सीमेंट के जंगल में नरसंहार संस्कृति के मैनफोर्स को समझना बहुत मुश्किल है इनदिनों।


बालीवूड,टालीवूड,कलिवूड,टीवी चैनलों और अखबारों के नेट संस्करण से लेकर राजनीति और तमाम कला माध्यमों में यह रंगभेदी स्त्री विरोधी अनंत बलात्कार का सिलसिला मैनफोर्स का जलवा है।


अब सामाजिक यथार्थ पुरानी फिल्मों और पुरातन स्मृतियों के धुंधले फ्रेम या कालजयी साहित्य के दायरे में सीमाबद्ध है। मुक्तबाजारी सामाजिक यथार्थ फिर वही मैनफोर्स का जलवा है या फिर रईस मलाईदार बेडरूम का आंखों देखा हाल या आउटडोर शूटिंग है।


कास्टिंग काउच कहां है और कहां नहीं है,समझना बेहद मुश्किल है और बाजार में हर चीज खरीदी जा सकती है जिंदगी के सिवाये।


मौत तो सुपारी देते ही किसी की भी कभी बुलायी जा सकती है।जैसे मनुष्यता और प्रकृति के विध्वंस के लिए यह सुपारी दुनियाभर की सरकारों ने मुक्तबाजार के नृशंस हत्यारों और मनुष्ता प्रकृित के विरुद्ध युद्ध अपराधियों को दे रखी है।जनादेश भी यही है।


हम मान रहे हैं कि सुबह सुबह अखबार आप देख ही चुके हैं और टीवी का दर्शन बी करते होंगे या फिर फेसबुक होंगे या व्हा्ट्सअप पर तो उपलब्ध सूचनाओं की जुगाली किये बिना कल हुई टाइटैनिक मुलाकात की ओर भी अपना ध्यान आकर्षित करना चैहेंगे।मुक्त बाजार के नये पुराने ईश्वरों की शिखर वार्ता थी यह नई दिल्ली में।भरत मिलाप से पहले दोनों तरफ से मिसाइलें भी खूब दागी गयीं।यह संसदीय सहमति से रंगभेदी अश्वमेध का हाट मोमेंट है।


बहरहाल मनमोहन सिंह ने हमारा कहा औपचारिक तौर पर साबित कर दिया कि कारपोरेट केसरिया फासिस्ट राजकाज में मेकिंग इन दरअसल यूपीए की जिराक्स कापी है।उन्हें धन्यवाद।


जो हम जनसंहारी नीतियों के सिलसिले में निरंतर रेखांकित करते रहे हैं कि यह राष्ट्र दरअसल 15 अगस्त से बाद मनुस्मृति के धारकों वाहकों को सत्ता हस्तांतरण के मुहूर्त से ही मुकम्मल हिंदू राष्ट्र है और राजकाज तभी से संघ परिवार का एजंडा है जिसका मुख्य लक्ष्य जीवन के हर क्षेत्र से बहुसंख्य बहुजनों का बहिस्कार और कत्लेआम है।


रंगों का जो फर्क है वह दरअसल नरम धर्मनिरपेक्ष हिंदुत्व और गरम बजरंगी धर्मोन्मादी हिंदुत्व का है।


जल जंगल जमीन नागरिकता आजीविका मानव अधिकारों और नागरिक अधिकारों,प्रकृति पर्यावरण और मौसम जलवायु से बेदखली और संसाधनों की लूट खसोट,सामंती दमन उत्पीड़न,नरसंहार संस्कृति और देश बेचने का सिलसिला पंद्रह अगस्त,1947 से चालू है।


मसलन सशस्त्र सैन्यबल विशेषाधिकार कानून 1958 से ही लागू है और विकास के मंदिर बनाने में पूंजी के हित में जो बेदखलियां नेहरु जमाने में हुई,उन महापरियोजनाओ की बेदखल आबादियों का पुनर्वास अभी तक नहीं हुआ है और न किसी को कभी मुआवजा मिला है।


फर्क बस इतना है कि जनविरोधी संस्कृति की मनुस्मृति व्यवस्था,स्त्री विरोधी पुरुषवर्स्व का यह तिलिस्म अब 1991 से मुक्तबाजार में तब्दील हो गया है और राजकाज का केसरिया कारपोरेट चेहरा बेपर्दा हो गया है।


सामाजिक यथार्थ का इतिहासबोध साक्षी है कि भारत का सत्तावर्ग हजारों हजारो साल से प्रजाजनों को गुलामों,बंधुआ मजदूरों और दासों से बदतर जिंदगी और अपनी स्त्रियों समेत तमाम स्त्रियों को निरंतर उत्पीड़न के लिए ही धर्म अधर्म के तमाम व्यूह रचता रहा है और उसे महिमामंडित करने के लिए आज के मीडिया की तरह मौखिक श्रुति मीडिया का प्रसारण धार्मिक कर्मकांड के मार्फत करता रहा है।


मनुस्मृति का वह वैदिकी तंत्र लगातार मजबूत होता जा रहा है और भारतीय संदर्भ में फासिज्म के अनेकानेक अध्याय देश के कोने कोने में बर्बर उत्पीड़न, अत्याचार,नरसंहार,बलात्कार, दंगों,बेदखली,अस्पृश्यता,जाति धर्म के नाम पर दंगों,नस्ली भेदभाव और प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूटखसोट में बारंबार अभिव्यक्त होती रही है।गुलाम प्रजाजनों की अंध आस्था की मुनाफावसूली के शेयरभावों के मुताबिक।


शुरु से ही वैकल्पिक राजनीति फेल है।


यह नाकामयाबी वामपंथ और अंबेडकरवादी राजनीति की सत्ता में भागेदारी की आत्मह्त्या की फसल है कि अस्मिताओं के संघी मायाजाल चक्रव्यूह में जन प्रतिबद्धता दफन हो गयी है और अब मुक्तबाजारी विलियनर मिलयनर राजनीति में सारे रंग एकाकार केसरिया केसरिया है।


भारत की मेहनतकश जनता के साथ यह सबसे बड़ा विश्वासघात है कि जनता जब जब व्यवस्था परिवर्तन के लिए सड़क पर उतरती है,कयामत का शिकंजा और मजबूत हो जाता है वर्गीय शासन और नरसंहारी राजकाज  फासिस्ट स्थाई मनुस्मृति बंदोबस्त के तहत।


इस वर्गीय शासन और राजकाज के फासिस्ट स्थाई मनुस्मृति बंदोबस्त को बदलने के लिए अब और आंखमिचौनी के बदले हम सीधे इस सामाजिक आर्थिक यथार्थ के निरंतर प्रवाहमान इतिहास को मान लें कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और यहां हिंदू साम्राज्यवादियों का ही वर्गीय वर्चस्व है जो मनुष्यता और प्रकृति दोनों के लिए कयामत का मंजर है।


मनुस्मृति के इस फासिस्ट मंजर को बदले बिना सत्ता परिवर्तन से कोई बदलाव इस राष्ट्र व्यवस्था में होगी नहीं जो दरअसल बहुसंख्य बहुजनों के खिलाफ कारपोरेट सैन्य दमन तंत्र के सिवाय कुछ भी नहीं है।


अस्मिताओं को तोड़े बिना,पूरे देश की मनुष्यता को बदलाव के लिए जोड़े बिना यह असंभव है कि धार्मिक ध्रूवीकरण के वर्गीय शासनतंत्र को बदलने के लिए हम कुछ भी कर सकें।


संघ परिवार के हिंदू साम्राज्यवादी एजंडे को अंजाम देने वाली सत्ता वर्गीय कांग्रेस भाजपा के दो दलीय धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण सत्ता समीकरण संघ परिवार का राजकाज रहा है और आंखों में उंगली डालकर हम लगातार बता रहे हैं कि हरित मोनसेंटो जहीरील क्रांति,भोपाल गैस त्रासदी और डाउ कैमिक्लस का देश व्यापी सेज महासेज स्मार्ट बुलेट साम्राज्य,बाबरी विध्वंस और देश विदेश दंगों का सिलिसला और सिखों का नरसंहार से लेकर गुजरात नरसंहार से लेकर मुक्तबाजारी सारे जनसंहारी सुधार संघी फासिस्ट मनुस्मृति हिंदू साम्राज्यवाद के दोनों धड़ों,नरम और गरम हिंदुत्व का साझा उपक्रम है।




Sukriti Ranjan Biswas

3 mins ·

Many people have asked me-- whether I have read the news of Ei-Samoy of 28th May, 2015.The heading of the news is ' with the initiative of Modi the Evacuee (from Bangladesh) will be the Citizen of India'. Going through the news many people have phoned me with joy.But the gist of the news, what I understand, is that the govt. wants to declare the Bangladeshi Hindus in India as Evacuee first with 'Residential Permits',afterwards may be granted Citizenship of India, --- Am I wrong? Is the proposal good for the Bengali Hindu Refugees? Is it acceptable?

सरकार किन बांग्लादेशियों को देगी भारतीय नागरिकता, फोटो पर क्लिक करके जानें...

इन बांग्लादेशियों को मिलेगी भारतीय नागरिकता

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Bhanwar Meghwanshi added 2 new photos.

15 hrs · Pune · Edited ·

...अंतत: डांगावास दलित संहार की सीबीआई जांच के आदेश हो गये है,यह जनशक्ति की विजय है. बधाई !

Bhanwar Meghwanshi's photo.

Bhanwar Meghwanshi's photo.


कुछ भी कहिए सामाजिक न्याय के प्रति जो प्रतिबद्धता लालू प्रसाद में है, वह नीतीश कुमार में नहीं है। आज जिस तरह से उन्होंने एक भुमिहार मंत्री के कहने पर दलितों और पिछड़ों से किनारा किया है, उससे एक बात तो साफ़ होती दिख रही है कि वे भाजपा एक दलाल हैं और सामाजिक न्याय की राजनीति को कमजोर कर रहे हैं। - नवल

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মাঝেমধ্যে মনে হয় অসৎ পথে রোজগার করে রাতারাতি বড়লোক হয়ে যাই! তারপর সেই মেয়েকে...

'আমার পক্ষে ওই মেয়েকে ভালো লাগার কথা বলা সম্ভব নয়'

ঢাকা বিশ্ববিদ্যালয়ের এডুকেশনাল অ্যান্ড কাউন্সেলিং সাইকোলজি বিভাগের অধ্যাপক মেহতাব খানম। তিনি আপনার মানসিক বিভিন্ন সমস্যার সম্ভাব্য সমাধান দেবেন। অল্প কথায় আপনার সমস্যা তুলে ধরুন।—বি. স. সমস্যাআমার বয়স ২৫ বছর। বছর দেড়েক আগে এক মেয়েকে ভালো লেগেছে। তার সঙ্গে...

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থাইল্যান্ডের চিংড়ি ও সি ফুড শিল্পে কর্মরত সাড়ে ছয় লাখ শ্রমিকের মধ্যে তিন লাখই ক্রীতদাস হিসেবে কাজ করছেন। এঁদের বেশির ভাগই বাংলাদেশি...

মালয়েশিয়ার বৈধ পথ সীমিত, অবৈধ অবারিত

বাংলাদেশ থেকে বৈধভাবে মালয়েশিয়ায় শ্রমিক হিসেবে যাওয়ার সুযোগ একেবারেই সীমিত। সাড়ে ১৪ লাখ লোক নিবন্ধন করেও যেতে পারছেন না। কিন্তু অবৈধভাবে যাওয়ার সুযোগ অবারিত। যাওয়ার আগে টাকা লাগে না, আবার কোনো রকমে পৌঁছালেই কাজ মিলছে—দালালদের এমন প্রলোভনে পা দিচ্ছে...

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लगभग आधी रात है लेकिन आसानी से नींद नहीं आ रही। 150 मुस्लिम वल्लभगढ़ पुलिस स्टेशन पर हैं। इनके घर जला दिए गए हैं और पड़ोसी बैरी..पढ़ें, पूरी खबर...

मस्जिद मे आग लगा दी गई थी। इसके बाद मुस्लिमों ने गांव छोड़ दिया...

सब कुछ जला दिया, थाने पर रात काट रहे मुस्लिम लगभग आधी रात है लेकिन आसानी से नींद नहीं आ रही। 150 मुस्लिम वल्लभगढ़ पुलिस...

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'নারীকর্মীদের জন্য ৮০০ রিয়াল বেতন ধরা হয়েছে, এরপর যত বাড়ানো যায়।'

সৌদিতে শিগগিরই ২০ হাজার নারীকর্মী যাবে

রোজার আগেই সরকার সৌদি আরবে ২০ হাজার নারীকর্মী পাঠাবে। এ লক্ষ্যে সারা দেশে নারী গৃহকর্মী বাছাই করা হচ্ছে। এ তথ্য জানিয়ে সরকারি সূত্র বলছে, ৩০ মে পর্যন্ত দেশের ৪২টি জেলায় সৌদি আরবে নারী গৃহকর্মী বাছাই চলবে। জেলা কর্মসংস্থান ও জনশক্তি কার্যালয় এবং কারিগরি প্রশিক্ষণ কেন্দ্রগুলোতে...

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अवश्य पढ़ें शेयर करे वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक-भारतीयों की खुशी को लगा भोगवाद का ग्रहण http://ow.ly/2ZebKZ

वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक-भारतीयों की खुशी को लगा भोगवाद का ग्रहण

वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक-अब लोगों की खुशी और आत्म-संतोष के स्तर में लगातार गिरावट आती जा रही है। इस बदलाव की पुष्टि हाल ही में जारी वैश्विक...

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Dalit Adivasi Dunia

त्रिपुरा में 18 साल बाद आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) को हटाने का फैसला

अगरतला. त्रिपुरा से आखिरकार 18 साल बाद आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) हट गया। मुख्यमंत्री मणिक सरकार ने बुधवार को इसे तत्काल प्रभाव से हटाने का एलान किया। कैबिनेट बैठक में यह फैसला हुआ। राज्य में यह विवादित कानून 16 फरवरी 1997 से लागू था।

सरकार ने कहा, 'राज्य में घुसपैठ लगभग खत्म हो गई है। इसे हटाने की मांग भी लंबे समय से चल रही थी। इसे 18 साल से हर छह महीने बाद बढ़ाया जा रहा था। हाल में जब इसे दोबारा बढ़ाने का प्रस्ताव आया तो हमने सभी पक्षों से रिपोर्ट मांगी। अंतत: सुरक्षा एजेंसियां भी इसे हटाने पर सहमत हो गईं।' फिलहाल मणिपुर और जम्मू-कश्मीर में अफस्पा लागू है।

क्या है अफस्पा कानून

सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) उपद्रवग्रस्त पूर्वोत्तर में सेना को कार्रवाई में मदद के लिए 11 सितंबर 1958 को पारित किया गया। बाद में जब 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद ने सिर उठाया, तब 1990 में इसे वहां भी लागू किया गया। अफस्पा कानून कहीं भी तब लगाया जाता है जब वो क्षेत्र वहां की सरकार अशांत घोषित कर देती है। इस कानून के लागू होने के बाद ही वहां सेना या सशस्त्र बल भेजे जाते हैं, जिन्हें किसी भी कार्रवाई के लिए सरकार की अनुमति नहीं लेनी होती है।

इरोम शर्मिला 15 साल से अनशन पर

मणिपुर से इस कानून को हटान के लिए समाजसेवी इरोम शर्मिला पिछले 15 साल से अनशन पर हैं। उन्हें जिंदा रखने के लिए जबरन नाक से पेय पदार्थ दिए जाते हैं। लेकिन राज्य की सरकार ने इसे हटान से मना कर दिया है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में कई पॉलिटिकल पार्टियां लगातार विरोध करती रही हैं। कभी भी उनकी अपील केंद्र को नहीं भेजी गई, क्योंकि इसका निर्णय सेना का कमांडेंट ही लेता है।

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Jayantibhai Manani

2 hrs · Edited

मेरिट किसी जाति, वर्ण या धर्म-साम्प्रदाय की बपौती नहीं है. एससी, एसटी या ओबीसी समुदाय में कमी रही है अवसर की., अगर अवसर मिला तो दलित हो या मुस्लिम, बेटी हो या बेटा, मेरिट का डंका बजाने में पीछे नहीं रहेते. हमें गर्व और गौरव है, इन बच्चियों पर...

What Brahmin Merit? In Punjab, with 98.92% marks, a Dalit girl secured 2nd position in class 10th!

Few weeks back, I wrote on What Merit? In Punjab, Class 12th, Dalit Girl got 7th position and a Muslim Girl became topper. Now, here is another on the same...

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अवश्य पढ़ें शेयर करे हिन्दू महासभा की स्वामी अग्निवेश का सर कलम करने वाले को 5 लाख रुपये देने की घोषणा, दुनिया भर में कड़ी निंदा http://ow.ly/2ZdPSu

हिन्दू महासभा की स्वामी अग्निवेश का सर कलम करने वाले को 5 लाख रुपये देने...

राइट लाइवलीहुड अवार्ड विजेताओं ने स्वामी अग्निवेश की हत्या करने के लिए उकसावे की कड़ी निंदा की है। राइट लाइवलीहुड अवार्ड विजेताओं और राइट लाइवलीहुड...

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शिक्षा और संस्कृति का भगवाकरण हमेशा ही फासिस्टों के एजेण्डा में सबसे ऊपर होता है। स्मृति ईरानी जैसी कम पढ़ी-लिखी, टीवी ऐक्ट्रेस को इसीलिए मानव संसाधन मंत्रालय में बैठाया गया ताकि संघ परिवार बेरोकटोक अपनी मनमानी चला सके।

http://www.mazdoorbigul.net/archives/5826

शिक्षा और संस्कृति के भगवाकरण का फासिस्ट एजेण्डा – जनता को गुलामी में जकड़े रखने की साज़िश �

शिक्षा और संस्कृति का भगवाकरण हमेशा ही फासिस्टों के एजेण्डा में सबसे ऊपर होता है। स्मृति ईरानी जैसी कम पढ़ी-लिखी, टीवी ऐक्ट्रेस को इसीलिए मानव संसाधन मंत्रालय में बैठाया गया...

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এই মামলায় সরকারের কত টাকা খরচ হয়েছিল তাও জানানো সম্ভব নয়। তবে এ কথা জানানো হয়েছে, এই মামলায় বিশেষ...

সালমান খানের মামলার ফাইল পুড়ে গেছে!

বলিউডের প্রভাবশালী তারকা অভিনেতা সালমান খানের বিরুদ্ধে দায়ের করা গাড়িচাপা দিয়ে মানুষ হত্যা মামলার নথি নেই মহারাষ্ট্র সরকারের কাছে। অগ্নিকাণ্ডে তা পুড়ে গেছে। সালমান খান ওই মামলায় দোষী সাব্যস্ত হলেও, এখন জামিনে মুক্ত আছেন।মনসুর দরবেশ নামের এক সমাজকর্মী ভারতের তথ্য জানার...

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हर साल की तरह इस साल भी छोटा उदयपुर के संखेड़ा तालुका के 16 गांवों के करीब 125 बच्चों को नर्मदा जिले में स्थित अपने स्कूल पहुंचने के लिए उफनती हुई हीरन नदी पार करनी पड़ेगी। पढ़ें खबर...

इन बच्चों को इस साल भी तैरकर जाना होगा स्कूल

कुछ नहीं बदलाः इस साल भी तैरकर जाना होगा स्कूल इस साल भी संखेड़ा तालुका के करीब 125 बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए उफनती हीरन नदी पार करनी पड़ेगी...

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विदेशी जमीन पर भाड़े के टट्टू करें पुकार- मोदी-मोदी

हाल ही में संपन्न मोदी के चीन दौरे को कथित तौर पर सफल और यादगार बनाने का श्रेय भी एक गुजराती इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को ही जाता है। एक अंग्रेजी अखबार...

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Jagadishwar Chaturvedi

23 hrs ·

ईमानदार आदमी के सामने पीएम मोदी हमेशा गलत साबित हुए हैं, मोदी के ईमान में खोट है जी!!

CAT directs government to reconsider inter cadre deputation request of whistleblower Sanjiv...

चतुर्वेदी के कैडर बदलने की अपील पर फिर विचार करे मोदी सरकार: कैट कैट ने व्हिसलब्लोअर आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के कैडर बदलने के निवेदन पर...

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Dalit Adivasi Dunia

Yesterday at 11:43am ·

राजस्थान में गुर्जरों का आंदोलन ख़त्म

जयपुर: राजस्थान में गुर्जरों का आंदोलन ख़त्म हो गया है। सरकार ने कानून बनाकर उन्हें विशेष पिछड़ा वर्ग के तौर पर 5 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया है। इसके लिए राज्य विधानसभा में बिल पास करके केंद्र के पास भेजा जाएगा और इसे नौवीं अनुसूची में डाला जाएगा। इसके बाद ये अदालतों की समीक्षा के दायरे से बाहर हो जाएगा। केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों की बातचीत के बाद ये फ़ैसला हुआ।

इस बार आठ दिन चले इस आंदोलन का सबसे बुरा असर ट्रेनों पर पड़ा। माना जा रहा है कि इस एक हफ़्ते में हुआ नुकसान 200 करोड़ रुपये से ऊपर का है।

इतिहास के आईने में गुर्जर आंदोलन

वैसे पिछले एक दशक में याद करें तो लगभग हर साल गुर्जरों का आंदोलन एक बार ज़रूर होता है। आरक्षण की व्यवस्था ने भारतीय राजनीति और समाज को जिस तरह बदला है, उसे देखते हुए ही गुर्जर भी अपने लिए अलग से आरक्षण चाहते रहे हैं। सरकारों ने कानून पास किए, लेकिन अदालतों में वो टिक नहीं पाए। एक नज़र इस उलझे हुए इतिहास पर।

साल 2006 में भी गुर्जर आंदोलन सुर्खियों में रहा था। 2007 में भी चले आंदोलन में 23 मार्च को पुलिस कार्रवाई में 26 लोग मारे गए थे। 2008 में भी ये आंदोलन फिर से चल पड़ा। दौसा से भरतपुर तक पटरियों और सड़कों पर बैठे गुर्जरों ने रास्ता रोके रखा। पुलिस की कार्रवाई में उन दिनों 38 लोग मारे गए।

दरअसल हर दो-एक साल पर राजस्थान के कुछ इलाकों से गुर्जर आंदोलन की ख़बर आती है और दिल्ली मुंबई का रास्ता रुक जाता है। सवाल है, क्या चाहते हैं ये गुर्जर और क्या है इनका आंदोलन।

- देश भर में उत्तर-पश्चिमी भारत के कई राज्यों में गुर्जर समुदाय के क़रीब साढ़े पांच करोड़ लोग हैं।

- इनमें 11 फ़ीसदी, यानी क़रीब 6 लाख लोग राजस्थान में हैं।

- जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में इन्हें अनुसूचित जनजाति, यानी आदिवासियों का दर्जा हासिल है।

- जबकि राजस्थान में वो ओबीसी में आते हैं और इस तौर पर उन्हें आरक्षण के फ़ायदे मिलते हैं।

लेकिन गुर्जर समुदाय को लगता रहा है कि उन तक पिछड़ा वर्ग के लाभ पहुंच नहीं पा रहे। उनकी मांग है कि उन्हें आदिवासियों में शामिल किया जाए। हालांकि इस मांग के ख़िलाफ़ राज्य का मीणा समुदाय भी आंदोलन कर चुका है जिसे लगता है कि अगर गुर्जरों को आदिवासी मान लिया गया तो उनके हक़ मारे जाएंगे।

सरकारें गुर्जरों की मांग मानती रही हैं लेकिन अदालतों से फ़ैसले ख़ारिज होते रहे हैं।

- 2003 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने गुर्जरों को एसटी स्टेटस देने का वादा किया।

- 2008 में वसुंधरा सरकार ने गुर्जरों को विशेष पिछड़ा वर्ग का दर्जा देते हुए 5 फ़ीसदी आरक्षण देने की घोषणा की। साथ ही 14 फ़ीसदी आरक्षण आर्थिक तौर पर कमज़ोर लोगों के लिए घोषित किया।

- लेकिन राजस्थान हाइकोर्ट ने अंतरिम आदेश में इसे रद्द कर दिया, ये कहते हुए कि इससे कुल आरक्षण 68 फ़ीसदी हो जाता है जो सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ है।

- 2012 में राज्य सरकार ने गुर्जरों सहित पांच जातियों को 5 फीसदी का रिज़र्वेशन देने की बात की।

- लेकिन 2013 में हाइकोर्ट ने इसे भी ये कहते हुए खारिज कर दिया कि फिर आरक्षण 54 फ़ीसदी हो जाता है।

अब गुर्जर नेताओं का कहना है, अब आदिवासी दर्जा भले न मिले, उन्हें पचास फ़ीसदी की तय सीमा के भीतर ही पांच फ़ीसदी आरक्षण चाहिए। उनकी शिकायत ये भी है कि सरकार जाटों पर तो मेहरबान है, उन पर नहीं।

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मध्य प्रदेश में किसान बदहाल हैं, कोई बच्चे गिरवी रख रहा है तो कोई कर्ज और फसल चौपट होने से आत्महत्या जैसे कदम उठाने से नहीं हिचक रहा है, वहीं राज्य की शिवराज सरकार 'कृषि महोत्सव' मनाने में लगी है. इतना ही नहीं, भाजपा सरकार ने सिर्फ 'कृषि गान' पर 50 लाख रुपए खर्च कर दिए हैं.

Read More : http://hindi.news18.com/…/shivraj-government-forgot-farmers…

गरीबी से मरते किसानों को भूले शिवराज, कृषि गान पर खर्च कर डाले 50 लाख रुपए! - News18 Hindi

मध्य प्रदेश में किसान बदहाल हैं, कोई बच्चे गिरवी रख रहा है तो कोई कर्ज और फसल चौपट होने से आत्महत्या जैसे कदम उठाने से नहीं

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Narendra Modi government sets the ball rolling! Union Urban Development Ministry's flagship programmes - ‪#‎SmartCity‬ project, Atal Mission for Urban Renewal and Transformation (AMRUT) and Housing For All - are planned for launch next month. http://ow.ly/NAlwf

Modi govt gets rolling! Smart City project, Housing for All set for June launch - The Economic Times

Smart City is PM Modi's ambitious project. Each selected city would get central assistance of Rs 100 crore per year for five years.

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The latest salvo on Twitter comes from Sachin Bansal of Flipkart who took on Snapdeal for saying India doesn't have the programmers it needs. He was joined by Paytm's Vijay Shekhar Sharma, who runs India's largest mobile wallet company. http://ow.ly/NAjQs

Don't blame India if you can't hire good engineers, Flipkart's Sachin Bansal tells Snapdeal

"India has engineers, architects and all you need. People seek purpose and mission to give their life to." Sharma has 12,500 followers including Snapdeal...

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Madhuri Dixit - Nene Served Notice For Promoting ‪#‎Maggi‬ Noodles

A case will be registered against Madhuri Dixit if she fails to reply to the notice within 15 days. Dixit might also have to answer on how Maggi noodles is good for health and on what basis she is defending it.

Madhuri Dixit served notice for promoting Maggi noodles | Tehelka Web Desk | Tehelka.com

A case will be registered against Madhuri Dixit if she fails to reply to the notice within 15 days. Dixit might...

TEHELKA.COM


Biggest crime you've never heard of: when US and UK killed half a million children

US and UK enforced sanctions killed more than 500,000 children. Ian Sinclair tells the story of the crime against humanity you've never heard of. READ MORE...

STOPWAR.ORG.UK|BY STOP THE WAR COALITION


असम के सोनितपुर जिले के तोराजुली चाय एस्टेट में आज एक पुजारी द्वारा 5 साल के एक बच्चे की बलि देने का मामला सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर..

पुजारी ने काटा 5 साल के बच्चे का सिर

पुजारी ने काटा 5 साल के बच्चे का सिर असम के सोनितपुर जिले के तोराजुली चाय एस्टेट में आज एक पुजारी द्वारा 5 साल के एक बच्चे की बलि देने का मामला सामने आया है...

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Vidya Bhushan Rawat

6 hrs · Indiatimes ·

So events are being managed. Sadly Mr Modi is not the able to go beyond narrow con fines of Gujarat and its business mentality. He need to enlarge his heart and mind and reach to everyone. Secondly, these event managements abroad are not going to serve any purpose as at the end they are being exposed now. The Prime Minister of India already speak a lot and therefore people know him but his act should speak now. We have super speaker in our parliament but as politicians they failed. Modi stand nowhere in front of them as speaker and ideologue but at the time of polarised anti reservation middle class whatever he speak is like flowing words of dharmshastras. No issue but in 2019, it is the work that he does will speak and by that time, I am sure people of India will be too much bored with these event management shows.

Gujarat team behind PM Narendra Modi's successful foreign events - The Times of India

While BJP workers from Gujarat had thronged the narrow lanes of Varanasi to campaign for Modi ahead of the Lok Sabha polls last year, event managers from...

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अवश्य पढ़ें शेयर करे आरएसएस का राष्‍ट्रद्रोह पूरी तरह उजागर – सोशलिस्ट पार्टीhttp://ow.ly/2ZfRgn

आरएसएस का राष्‍ट्रद्रोह पूरी तरह उजागर - सोशलिस्ट पार्टी

आरएसएस -कारपोरेट घरानों के मन की बात का एक साल । गरीबी, भूख, कुपोषण, बीमारी, बेरोजगारी, आत्महत्याओं में बढ़ोतरी

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मोदी सरकार अपनी पूर्ववर्ती सरकारों से सिर्फ़ इस मायने में अलग है कि वह अपने मालिक यानी पूँजीपति वर्ग के सामने कहीं अधिक निर्लज्जता के साथ नतमस्तक होने के लिए तत्पर है। जहाँ पहले सरकारों के प्रधानमन्त्री खुले रूप से पूँजीपतियों से अपने सम्बन्ध उजागर करने से परहेज़ करते थे, नरेन्द्र मोदी पूँजीपतियों से खुलेआम गले मिलते हैं, उनके कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं और अपनी मालिक भक्ति की बेहिचक नुमाइश करते हैं। 'मेक इन इण्डिया' को औपचारिक रूप से लांच करने के कुछ ही दिनों के भीतर मोदी ...

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भारत को 'मैन्युफ़ैक्चरिंग हब' बनाने के मोदी के सपने के मायने - मज़दूर बिगुल

मोदी सरकार अपनी पूर्ववर्ती सरकारों से सिर्फ़ इस मायने में अलग है कि वह अपने मालिक यानी पूँजीपति वर्ग के सामने कहीं अधिक निर्लज्जता के साथ नतमस्तक होने के लिए तत्पर है। जहाँ...

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दुनिया में भुखमरी के शिकार लोगों में सबसे ज्यादा भारत में पाए जाते हैं, कितनी दयनीय हालत है भारत में गरीबों की जानने के लिए फोटो पर क्लिक करें...

दुनिया में भुखमरी के शिकार सबसे ज्यादा लोग भारत में: UN रिपोर्ट

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा भूखे लोगों वाला देश बन गया है और इस मामले में भारत ने चीन को भी पीछे...

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মূল্যস্ফীতি নিয়ন্ত্রণে, প্রবাসী-আয়ও বাড়ছে। বৈদেশিক মুদ্রার মজুত এখন ইতিহাসে সবচেয়ে বেশি। বিনিময় হার ঠিকঠাক। রপ্তানি প্রবৃদ্ধি সামান্য হলেও আমদানি বাড়ছে। লেনদেনের ভারসাম্য নিয়ন্ত্রণে http://www.prothom-alo.com/economy/article/540526

বাজেট বাড়ছে, প্রবৃদ্ধি কমছে

দেশের অর্থনীতির অবস্থা এখন অনেকটা মান্না দের সেই গানটির মতো। 'দীপ ছিল শিখা ছিল, শুধু তুমি ছিলে না বলে আলো জ্বললো না।' অর্থনীতির এই 'তুমি'টা হচ্ছে বিনিয়োগ। অনুকূল একটা সামষ্টিক অর্থনীতি নিয়েও '৬ শতাংশ প্রবৃদ্ধির ফাঁদ' থেকে দেশ বের হতে পারল না কেবল...

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पीएम मोदी ने इस बार कुछ ऐसा कह दिया है जो बिल्कुल सच नहीं लग रहा, क्या कहा उन्होंने जानने के लिए फोटो पर क्लिक करें...

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मोदीजी, बताएंगे 150 रुपये में सीमेंट कहां मिलता है?

पीएम मोदी एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में कुछ ऐसा कह गए जो सही नहीं है, उन्होंने कहा कि...

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